असर का असर

पंकज कुमार पांडे

हर वर्ष शिक्षा की जो देता खबर है,
हे प्रियवर! वही तो असर है।
खोजी प्रथम ने जो रस्ता बनाया है,
नागरिकों ने उस पर चल कर दिखया है।
सन 2005 से हर वर्ष यह जाना है,
कि कितनी सजी है बगिया और कितना सजाना है।
कितने फीसदी बच्चे नामांकित दिख रहे हैं,
कितने फीसदी भाषा-गणित सिख रहे हैं।
पौधे लगे हैं बाग में तो कलियां भी खिलनी चाहिए,
नामांकित हैं बच्चे तो अच्छी शिक्षा भी मिलनी चाहिए।

फूलों की क्यारी में कितनी नमी है,
कक्षा पूर्व तैयारी में क्या कुछ कमी है?
हो रहा विकास जो भावना-संज्ञान का,
लाएँगे आँकड़े भाषा-गणित के ज्ञान का।
होगी फिर चर्चा हर एक जुबाँ पर,
कि हो रही है चूक हमसे कहाँ पर।
समस्या का होगा निदान सामने,
तब आएँगे माँझी पतवार थामने।
देने को सहारा कई हाथ बढेंगे,
देश के भविष्य फिर भविष्य गढेंगे।