जब गाँव हमारा है तो नक्शा भी तो हम ही बनायेंगे

By Mahendra Singh Yadav, ASER State Associate, Madhya Pradesh

मध्य प्रदेश में असर 2016 का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद, जिला भिंड में, जिला स्तरीय प्रशिक्षण स्थानीय संस्था ब्राश संस्थान द्वारा आयोजित किया गया | इसमें लगभग 35 स्वंसेवकों ने भाग लिया | कार्यशाला में सभी स्वंसेवकों में, देश के लिए कुछ कर दिखाने का  एक जज्बा तथा उत्साह दिखाई दे रहा था | प्रशिक्षण के दूसरे दिन सभी स्वयंसेवक तीन टीम में पायलट (फील्ड विजिट ) के लिए गाँव में गए| इसमें से एक टीम गाँव सिसोनिया गई जहाँ प्रक्रिया के अनुसार गाँव का भ्रमण करना शुरु किया | भ्रमण करते समय हमारी टीम की मुलाकात गाँव के शर्मा जी  के साथ हुई | उन्होंने असर के बारे में पूछा, जिसका जवाब एक स्वंसेवक ने बड़ी सहजता के साथ दिया | गाँव घूमते हुए हम जैसे ही आगे बढ़े, शर्मा जी भी हमारे साथ हो लिए |

थोड़ी देर घूमने के पश्चात हम गाँव के केंद्र में पहुंचे जहाँ बहुत ग्रामीण बैठे हुए थे | हमारी टीम वहां बैठे लोगों से बात-चीत करना शुरू किया | इसके बाद हमारी टीम ने गाँव का कच्चा नक्शा बनाना शुरू किया | कुछ गलियाँ एवं प्रमुख स्थान उन्होंने इंगित नहीं किए | यह पूरी प्रक्रिया शर्मा जी शांत रहकर देख रहे थे लेकिन जब नक़्शे पर कुछ स्थान किसी दूसरी ओर चिह्नित किया गया तो फिर शर्मा जी से रहा न गया | तुरंत एक लकड़ी का टुकड़ा उठाया और जमीन पर लम्बी – लम्बी लाइन खींचकर नक्शा बनाना शुरू कर दिया |

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जब तक नक़्शे पर सभी दिशा तथा जानकारी नहीं लिख दी, तब तक वह इस कार्य में लगे रहे | नक्शा बनाते समय शर्मा जी गाँव के अन्य साथियों को समझाते भी जा रहे थे कि भाई जब गाँव हमारा है तो नक्शा भी तो हम ही बनायेंगे ! नक्शा पूरा होने के बाद शर्मा जी हमारे साथ घर चयन करने के लिए चल पड़े और साथ-साथ लोगों को यह भी समझाते जा रहे थे कि यह क्यों किया जा रहा हैं  तथा इससे क्या होगा | जब भाग एक में घरों का चयन किया जा रहा था तो वह हमारे साथ ही थे तथा बच्चों की जाँच की प्रक्रिया भी बड़े गौर से देख रहे थे | कुछ और घरों में बच्चों की जाँच देखने के बाद वह भी जाँच करने का तरीका सीख गए और अन्य लोगों को भी इसके बारे में बताने लगे | अपने गाँव के बच्चे जो पढ़ नहीं पा रहे थे उन्हें देख वे चिंतित थे और अन्य साथियों को भी अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करने लगे |

यह था असर का असर!