Manoj Kumar, Uttar Pradesh

मनोज कुमार शर्मा

असर एसोसिएट यू.पी.

मैंने अगस्त २०१६ में असर ज्वाइन किया | मुझे पहली बार नेशनल वर्कशॉप में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ | इसके तुरंत बाद राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण में ट्रेनर के रूप में कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | अन्य प्रशिक्षकों और अपने वरिष्ठ सहयोगियों से मिले सुझाव एवं मार्गदर्शन द्वारा मैंने १२ जिलों में असर सर्वे तीन चरणों में सफलता पूर्वक संपन्न करवाया|

राज्य स्तरीय असर संपन्न कराने के बाद मुझे ACR करने के लिए तेलंगाना जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ | वहां हमने करीमनगर जिले के चार गाँव विजिट किये जिसमे “चंदलापुर” गाँव की कहानी मै साझा कर रहा हूँ –

रविवार का दिन था | छुट्टी होने के नाते अधिकांश बच्चे घर पर ही मिल गए |  मेरे साथ असर मैनेजर भी थे | कक्षा ३ के शुभम नाम के बच्चे ने हमें पूरा गाँव का भ्रमण करवाया | प्राइवेट स्कूल का छात्र होने के बावजूद भी उसे सभी सरकारी स्कूल के बच्चों के नाम और घर का पता था | गाँव का सर्वेक्षण डायट के प्रशिक्षु छात्रों द्वारा किया गया था | अधिकांश अभिभावकों द्वारा असर के इस प्रयास को सराहा गया | गाँव भ्रमण के दौरान हमें ८० वर्षीय दादी टेस्टिंग टूल देखते ही अपने सभी बच्चों का शैक्षिक स्तर बताने लगी और हमसे उन्हें पढ़ाने के लिए कुछ शिक्षण सामग्री की मांग करने लगी | एकाएक उनकी तरफ से आयी इस डिमांड ने मुझे बहुत प्रभावित किया ! मैंने दादीजी को बच्चों की किताबों से जोड़ने का प्रयास किया तथा असर मैनेजेर से दादी को कुछ टी.एल.एम. उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया |

समुदाय में इस बदलाव को देखकर मुझे लगा की लोगों में “असर” का असर अवश्य हो रहा है !