यही है असर – सुनील कुमार

सर्वेक्षण का पहला दिन, सुबह 7 बजे से फ़ोन की घंटी बजनी शुरू हो गई | सर्वेयर को गाँव में जाने की बेचैनी और गाँव में जाने वाले रास्ते की तलाश में फ़ोन आने का सिलसिला लगातार 12 बजे तक चलता रहा |  

उस दिन हम भी रिक्शे में, बस में, पैदल फील्ड में जा रहे थे | मेरा फ़ोन मेरे कान के पास ही लगा रहा | मेरे पास से गुजरने वाले राहगीर, पास में बैठे लोग मुझे ही देखते रहे – किससे बात कर रहा है? क्या बात कर रहा है? क्यों इतनी बात कर रहा है? जैसे सवाल उनकी आँखों में अनुभव किए जा सकते थे | 

12 बजे के बाद फ़ोन आने का सिलसिला थोड़ा  कम हुआ | लेकिन, “सर, प्रधान से मिल चुके हैं”, “मैप बनाने में दिक्कत हो रही है”, “मेरा गाँव  4 भागो में बंटा है” आदि जैसे मुद्दों पर बातचीत चलती रही |

शाम के 7 बज चुके हैं, एक बार दुबारा फ़ोन की घंटी बजनी शुरू हुई |  “कितने घर हो पाए?”, “कितने बच्चों  की जाँच हुई?”, “कल कितने बजे जाएँगे?” जैसे सवालों के साथ बातचीत का यह सिलसिला रात 9 बजे तक चलता रहा |

उपर्युक्त प्रक्रिया सर्वे के तीनों दिन चलती रही |

कुछ सर्वेक्षकों ने कहा कि “हमें लगा कि हमें गाँव मिल गए हैं, अब हमें 3 दिन में सर्वेक्षण करके देना है | लेकिन पहले दिन से सर्वेक्षण के अंतिम दिन तक जिस तरह से असर टीम ने फ़ोन पर और गाँव में आकर सर्वेक्षण की मॉनिटरिंग की उससे पता चला की असर सर्वेक्षण करने की प्रासंगिता क्या है |  क्यों असर का असर लोगों पर हो जाता है | क्यों आज असर की एक अलग पहचान है |” वास्तव में असर सर्वेक्षण की इस कार्यशैली ने उनके अनुभव और सोचने के नज़रिये में परिवर्तन ला दिया |

सर्वेक्षण समाप्त होने के बाद डाटा जमा करने का दिन था | डाटा जमा करने का कार्य ऐतिहासिक भारत-माता के मंदिर के प्रांगण में सम्पन्न हुआ | इस दौरान सर्वेक्षको के द्वारा सर्वेक्षण किए गए गाँवों की अनगिनत कहानियाँ सुनने को मिली |

उनमें से एक सर्वेक्षक ने अपना अनुभव इस तरह सांझा किया, “जब हम एक घर में गए तो घर वाले हमें अजनबी समझ कर हमारे कार्य पर संदेह करने लगे | बच्चे के नाम लिखने से लेकर बच्चे की टेस्टिंग तक उन्होंनें अपने मोबाइल से हमारा वीडियो बनाया | हमने देखा कि घर का सर्वेक्षण समाप्त होने के बाद घर वाले अचानक हमें चाय, बिस्किट तथा अन्य खाने के सामग्री हमारे सामने लाने लगे | हम भी चौंक गए कि यहाँ अब ऐसा क्या हो गया?  अभी तो घर वाले संदेह कर रहे थे और वीडियो बना रहे थे अचानक इन्हें क्या हो गया | इस प्रश्न का उत्तर बाद में मिला | दरअसल  उनके बच्चे ने टेस्टिंग के सारे सवालों का उत्तर सही दे दिया था | बच्चे के प्रदर्शन से घर वाले काफी खुश थे | हमारी जाँच करने की सामग्री उन्हें बहुत पसंद आई थी | यह कहना गलत नहीं होगा कि घर वालों पर भी असर का असर हो गया था |”

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