Chalo Bihar : 2007 Summer Camp, a blessing

Posted by Bhalchandra Sahare (ASER Centre – Maharashtra)

सड़क, बिजली तथा शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा एक मिल्की गांव रोहतास जिले के दिनारा प्रखण्ड के करहॅंसी पंचायत में है। जहाॅं पर देखकर ही पता चल जाता है कि वह गाँव गरीबों का गाँव है।
इसी गाँव में रहने वाली बहुत ही गरीब परिवार की लड़की सुनिता है। जिससे बचपन में ही माँ का साया छिन गया था। पिता की गरीबी एवं माँ की कमी के चलते उसकी पढ़ाई पहली कक्षा के बाद ही रुक गई थी।
2007 में बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा समर कैम्प का आयोजन किया गया था। जो बालिका पढ़ाई में पिछे थी एवं जो बालिकाएँ कभी स्कूल ही नहीं गई थी और ऐसी बालिका जिन्होंने बीच में ही स्कूल जाना छोड़ दिया था उनके के लिए यह कार्यक्रम चलाया गया था।
सुनिता भी उन्ही बच्चियों में से एक थी। उस समय उसकी उम्र 15 वर्ष थी लेकिन वह केवल कक्षा पहली तक ही पढ़ी थी। इस समर कैम्प में स्थानीय शिक्षकों की मदद से उस बच्ची का नामांकन इस दो माह के समर कैम्प में कराया गया था। यह कक्षाएँ सुबह 6:30 बजे से 10:30 बजे तक चलाई जाती थी। जिस बच्ची को पढ़ना ही नही आता था वह इन दो माह में पढ़ना एवं गणित की मुलभूत गतिविधियां सीख चुकी थी। तबसे ही उसके मन में पढ़ने की ललक जाग उठी थी। उसी समय उसने 2008 में बाहर से परिक्षा देकर दसवीं की परिक्षा पास कर ली। यह देखकर उसकी सौतेली मां ने उसे आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। 2010 में सुनिता ने बारहवीं की परिक्षा पास कर ली।
बारहवीं के बाद उसकी शादी हो गई। शादी के बाद ससुराल के सारे काम-काज करके उसने बी.ए. फायनल की परिक्षा 2014 में पास की।
सुनिता ने शिक्षा में जो मुकाम हासिल किया है उसका श्रेय वह मिल्की गांव के शिक्षिका के साथ-साथ 2007 में बालिकाओं के लिए चलाये गये समर कैम्प को देती है। यह समर कैम्प बिहार सरकार, ’’प्रथम संस्था’’ एवं युनिसेफ के सहयोग से बिहार के सभी जिलों के दो-दो प्रखंण्डों में चलाया गया था। भविष्य में सुनिता उसके गांव की शिक्षिका की तरह बनना चाहती है। शिक्षिका बनकर गांव के पढ़ाई में पिछड़े बच्चों की वह मदद करना चाहती है।