Dharmpal – शिक्षा, माहौल और समाज

dशिक्षा, माहौल और समाज जहाँ तक मैं समझता हूँ ये तीनों शब्द एक दूसरे के पूरक हैं | शिक्षा पर आस-पास में रहने वालों के माहौल का काफी प्रभाव पड़ता है | असर के दौरान फील्ड का बहुत सारा अनुभव मिलता है | उसी अनुभव से मैंने इन चीजों (शिक्षा, माहौल और समाज) में आपसी तालमेल को करीब से देखा और महसूस किया है | इन चीजों को मैं एक कहानी से जोड़ने की कोशिश करूँगा जैसा मैंने देखा था | एक गाँव था उसमें एक मोहल्ले में समाज द्वारा माने जाने वाले निचले तबके के लोग रहते थे | उस गाँव में रोजगार के साधन काफी थे | वहां रह रहे परिवारों के बच्चों को ज्यादा कुछ करने कि जरुरत नहीं थी बस होश सँभालते ही रोजगार मिल जाता था | उस मोहल्ले के ज्यादातर बच्चे पढ़ने नहीं जाते थे और जो जाते थे वे भी जल्दी ही स्कूल छोड़ देते थे और उस काम में लग जाते थे | ऐसा कुछ समय तक चलता रहा, यहाँ तक कि एक-दो पीढियां भी गुजर गई | आज उस मोहल्ले का आलम यह है कि कुछ परिवारों को छोड़कर बाकी परिवारों के बच्चों की सोच यह हो गई है कि या तो पढेंगे ही नहीं या कुछ कक्षा पढ़कर छोड़ रहे हैं |

फंडा यह है कि ऐसा गाँव जिसके दूसरे मोहल्ले के बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं परिवार वाले शिक्षा को काफी महत्व देते हैं | एक UKG कक्षा का बच्चा जिसने बाकि के सवाल हल कर दिए और दूसरी तरफ एक मोहल्ले में ऐसा नजारा दिखा जो पूरे गाँव के ही विपरीत था | इससे मैं स्वयं रूबरू हुआ तो समझ में आया कि कैसे शिक्षा पर माहौल और समाज का प्रभाव पड़ता है और तमाम शिक्षा को आगे बढ़ाने वाली कोशिशें विफल होती नजर आतीं है |

लेकिन एक सवाल जो शिक्षा की तमाम योजनाओं और कानूनों पर प्रशनचिन्ह लगाता है वह यह है  कि ऐसी समस्याओं से कैसे निजात पाया जायेगा ? और कब हम यह कह सकेंगे की देश में शतप्रतिशत नामांकन हो और शतप्रतिशत प्रारम्भिक शिक्षा तक ठहराव सुनिश्चित हो ताकि ड्राप आउट का प्रतिशत नजर ही ना आए | सारी चीज़ें अपनी जगह है लेकिन जब तक हमारे देश का हर एक तबका शिक्षित नहीं होगा तब तक हमारी विकास कि बाते कोई विशेष मायने नहीं रखती हैं | चाहे स्वच्छ भारत हो या डिजिटल भारत हो या चाहे जो भी हो, बिना शिक्षा के प्रत्येक आदमी विकास योजनाओं से जुड़ नहीं पायेगा |

Dharm Pal

ASER Team, Rajasthan