Shyam Kolare – मेरा पहला असर – एक यादगार सफ़र !

 

img_8828असर का पहला दिन मुझे अभी भी याद है | 2008 मे मैं असर स्वयंसेवक के रूप में अपना पहला असर सर्वेक्षण करने के लिए मध्यप्रदेश के जिला छिन्दवाडा के तामिया विकासखंड में स्थित “ द हिडेन वर्ल्ड ’’ से जाने वाला क्षेत्र पातालकोट गया था l इस जगह का मैंने केवल नाम सुना था कभी  गया नहीं था l तीन दिन के जिला स्तरीय प्रशिक्षण के बाद गाँव का चयन हुआ | मुझे और मेरे एक साथी को पातालकोट के पास का गाँव, छिंदी दिया गया l

इस गाँव के बारे में जानकारी लेकर हम बस से छिंदी के लिए निकल पड़े l शनिवार को गाँव जानकारी व स्कूल का सर्वे पूरा करके आना था l शहर से इस गाँव की दूरी करीब 80 किमी होगी l सुबह 9 बजे हम निकल गए l उस गाँव के पास तक केवल एक ही बस जाती थी l करीब तीन घंटे के सफ़र के बाद छिंदी गाँव से 12 किमी पहले बस वाले ने हमें उत़ार दिया और बोला यहाँ से गाँव का रास्ता है l कुछ देर इन्तजार करने पर एक मिनी बस दिखाई दी जो उस गाँव के तरफ जा रही थी l हमने बस को रोका | वह बस पहले से ही पूरी भरी थी | हम खड़े-खड़े ही गाँव की और चल दिए l बस से जाते समय ऐसा लग रहा था जैसे हम धीरे-धीरे किसी खाई में अन्दर की ओर जा रहे है l कई पहाड़, खाई , जगल को पार करते हुए जा रहे थे l इस क्षेत्र को देखकर बड़ी सुखद अनुभूति हो रही थी परंतु थोडा डर भी लग रहा था | पहले कभी ऐसी जगह देखी न थी l मन ही मन हम  सोच रहे थे की कहा आ गए ?

करीब आधे घंटे में हम छिंदी पहुंचे l छिंदी जो की पातालकोट से लगा गाँव था काफी छोटा था | वहाँ स्कूल सर्वे, गाँव की जानकारी व सरपंच से मुलाकात आदि करके करीब तीन बजे हम बस स्टॉप पहुँच गए l बस 5 बजे थी l मन किया कि 5 बजे तक पातालकोट घूम लिया जाए l 49हम पातालकोट की तरफ चल पड़े l पातालकोट के पास जहाँ से उसके अन्दर जाने का रास्ता है वंहा से उस दुनिया को देखकर हम आश्चयर्य चकित हो गए ! लगभग 2-3  किमी गहराई वाली खाई  पातालकोट एक गहरा कटोरानुमा जमींन से नीचे का स्थान है जंहा विशेष पिछड़ी आदिवासी जनजाती के लोग रहते है l  पूछने पर पता चला कि यंहा 12 छोटे-छोटे गाँव हैं जो अन्दर ही है l  लोग यही अपना जीवन गुज़ार लेते है | बहुत लोग ऐसे हैं जिन्होंने ऊपर की दुनिया ही नहीं देखी| हमें बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि कैसे रहते होंगे यंहा के लोग ?

यह सब देखने के बाद हम घर लौट आए l दूसरे दिन भी हम गाँव गए ; गाँव का 20 घरों का सर्वेक्षण पूर्ण कर ऊपर से पातालकोट का नजारा देखकर वापिस आ गए l यह नजारा जो हमने पहली बार असर सर्वेक्षण के दौरान देखा वह सबसे सुखद अनुभव  था l वह दृश्य बहुत दिनों तक आखों के सामने घूमता रहा और मेरा पहला असर यादगार बन गया l इसके बाद हम यही सोचते थे की यूँही असर हर साल होता रहे और हमें नई-नई जगह घूमने का मौका मिलें!

By Shyam Kumar Kolare

ASER Associate, Madhya Pradesh