Upasana Roy – हस्ते रहना

fb_img_1476447774385२०११ मेरा सबसे पहेला असर था जब मैंने असर join किया था | तब शायद मुझे कोई अंदाजा भी नहीं था कि अगले आने वाले दिनों में मैं क्या अनुभव करने वाली हूँ | National Workshop के साथ अगस्त १ को सही मायनों में मेरा असर का सफर शुरू हुआ |

पहले दिन असर कैसे एक गांव में किया जाता है इस बात को समझाया गया | दूसरे दिन सभी मिल कर कुछ अलग – अलग गांव असर करने के लिए गए | दूसरे दिन के बाद जो मैंने अनुभव किया उसी अनुभव ने मुझे प्रेरित किया असर करने के लिए | जब ५ दिन का कठिन ट्रेनिंग ख़त्म हुआ तो मैं और मेरे साथी निकुंज कानपूर स्टेशन में नीलांचल एक्सप्रेस का इंतज़ार कर रहे थे | ट्रेन २ घंटे देरी से आने वाली थी | जब हम स्टेशन पर बैठे हुए थे , मैंने एक परिवार को देखा जो उसी ट्रेन का इंतज़ार कर रहे थे | img_0992-1उनमें एक लड़की थी जो लगभग ५-६ साल की थी | बह बहुत रो रही थी | उसके माँ – पापा बहुत ज्यादा परेशान हो रहे थे | तभी मैंने सोचा, क्यूँ न कुछ ऐसा किया जाए जिससे वह रोना बंद कर दे | जब मैंने उसको देख कर मुसकुराया तो कुछ देर तक तो वह मुझे देखती रही फिर उसने दुबारा रोना शुरू कर दिया | मैंने उसका नाम पूछा तो वह अपने माँ के पीछे जा कर छुप गयी | फिर मुझे पता चला उसका नाम अंजली है और प्यार से उसे पिंकी बुलाते हैं |

मैंने पिंकी को बोला आओ एक मजेदार काम करते हैं |  अचानक से वह मेरी तरफ देखने लगी और रोते-रोते थोड़ी देर रुक गयी | मैंने उसे असर का टेस्टिंग टूल दिखाया | कुछ देर तक तो वो खुद ही टूल को इधर-उधर करके देखती रही, फिर उमसे से उसे जो – जो पढ़ना आता था उसने सब पढ़ना शुरू कर दिया | बस कुछ ही देर बाद उसका रोना बंद हो चूका था और पिंकी पढ़ने मैं ही व्यस्त हो गयी थी | आखिर में हमारी ट्रेन जिस दिन सुबह आने वाली थी उसके २४ घंटे देर अगले दिन सुबह आई और हम वापस आए |

इसके बाद मुझे एक बात की समझ मिली की अगर मैं चाहूं तो अपने व्यवहार और आचरण से किसी का भी दिल जीत सकती हूँ | अगर किसी अनजान की तरफ भी आप अगर देख कर हसेंगे तो वह भी आप को देख के हँसेगा | कम से कम कुछ पलों के लिए ही सही वह अपनी सारी चिंता और दुःख भुला के हंसेगा | एक बार कोशिश तो कीजिये.. हमेशा हस्ते रहने की …

Upasana Roy

ASER Associate, Odisha