Sneha Dash – मुझ पर असर का असर

siमैं और असर २००९ से जुड़े हैं | असर करते हुए कब ये ८ साल निकल गए पता ही नहीं चला | इस सफ़र में मैंने बहुत कुछ पाया है, बहुत कुछ अनुभव किया है !

मुझे बहुत पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का मन था | मैं ऐसा अवसर ढूंढ ही रही थी जब प्रथम संस्था से मैं जुड़ी | हमेशा से मुझे ग्रामीण लोगों के बारे में जनने का बहुत शौक रहा है – ग्रामीण लोग कैसे रहते हैं, कैसे पढ़ते हे, कैसे जीवन गुजारते हैं | मैं जब कॉलेज में पढ़ती थी, रास्ते में कुछ बस्ती थे जहाँ पर छोटे बच्चे विद्यालय नहीं जाते थे, सारा दिन इधर – उधर घूमते रहते थे | मेरे दिमाग में यह ख्याल आता था की, “ इन बच्चों के लिए कोई सुविधा नहीं हे क्या?”

२००९ में पहले मैंने असर सर्वेक्षक का काम किया और पहली बार मुझे गाँव जाने का मौका मिला | ट्रेनिंग में सीखी गई प्रक्रियाओं को मैं सही ढंग से प्रयोग में लाना चाहती थी | s गाँव में जब हम पहुंचे तो लोग हमारे आने का कारण पूछने लगे | पहले मुझे लोगों को उत्तर देने में मुश्किल हो रही थी | सर्वे के लिए घर जाने पर लोग मुझसे ही प्रश्न करने लगते थे – घर के बारे में, मेरे माता पिता के बारे में | कभी कभी अगर जब सामान जाती के लोग होते तो शादी के बारे में भी पूछते थे | शुरुवात में मुझे जवाब देने में हिचकिचाहट हो रही थी और मरे मन में यह बात आई कि क्या मुझे गाँव के लोगों के इतने सारे सवालों का उत्तर देना चाहिए ? पर फिर मुझे यह अनुभव हुआ की जब मैं उनके सवालों का उत्तर देती हूँ तो हमारे बीच की दूरी कम हो जाती है और सर्वे करने की प्रक्रिया आसन | बच्चों के शैक्षिक स्तर को देख कर यह समझ आता है कि अगर वे पढाई में पीछे हैं तो उसका क्या कारण हो  सकता है |

अक्सर सर्वे के दौरान हम लोग गाँव के लोगों से बहुत घुल मिल जाते हैं | लोग भी हमें कुछ अपना समझने लगते हैं | पहली बार जब मैं गाँव गई तो  बहुत अच्छा अनुभव रहा था | लोगों का सहयोग, व्यवहार मुझे बहुत अच्छा लगा | इसके बाद मुझे कभी भी गाँव में जाकर काम करना मुश्किल नहीं लगा| गाँव के लोग निर्मल होते हैं मैंने सुना था पर जाकर पता चला लोग कितने अच्छे होते हैं | शुरुवात के इस अनुभव से मुझे आगे काम करने में बहुत सहायता हुई |

Sneha Dash

ASER Team, Odisha