चलते – फिरते

Kamal Tiwary

ASER Associate, Haryana

यात्रा शुरू हुई अब गांवों में घूमने की | हरियाणा में असर के एक गाँव के लिये मैं और मेरा साथी कूच करने निकले | यह गाँव मुख्य शहर से लगभग 60-65 किमी  दूर था | kआसानी से आधे रास्ते तक तो पहुँच गये पर गाँव का नाम अभी तक अनजान पहेली के तहर सामने था | धन्य है गूगल भाई साहब का जिन्होंने गाँव का रास्ता तो बता दिया पर अंग्रेजी भाषा के एक अक्षर ने भ्रम बनाया रखा | बस से उतर कर एक छोटे से क़स्बे पर पहुंचे जो हमारा पहला पड़ाव था | दोनों ही बीमार थे पर दिन भर गाँव में घूमने के भय से खाना खाने का निश्चय किया | अब असर करने की गुंजाइश और बढ़ गई | यह क़स्बा, लोगों के हर छोटे – बड़े सामान मिलने के लिए बहुत था | यहाँ ग्रामीण खरीदारी करने पहुंचे थे | हम दोनों ने यह देखा और निश्चय किया कि ऑटो, टैक्सी और स्थानीय लोगों से गाँव के बारे में जानकारी हासिल करें | यही शायद उस समय हमारे लिए सबसे सही उम्मीद थी  और हमने ऐसा ही किया | बहुत पता करने के बाद एक ऑटो वाले ने गाँव के बारे में कुछ बताया | ऑटो और गूगल भाई के भरोसे गाँव की यात्रा फिर शुरू कर गाँव पहुँच गए | चूँकि रविवार का दिन था और हमें पहले दिन का काम भी करने था अभी समय था सरपंच साहब से मिलने का जो ग्राम पंचायत भवन में थे | यहाँ का माहौल देख हमें बड़ा अच्छा लगा | हम तो भूल ही गए थे कि उस दिन गाँधी जयन्ती थी और गाँधी जयंती बड़े धूम धाम और रंगा-रंग कार्यक्रम व् खेल कूद प्रतियोगिताओं के साथ मनाई जा रही थी | कुछ अधिकारी और ग्राम पंचायत के सदस्य वहाँ आए थे | हमारे द्वारा उन्हें असर के बारे में बताने पर उन्होंने असर के बारे में विस्तार से जानकारी ली और आगे की कार्यवाही के लिए सहयोग  किया | जन्तर मंतर की भूल भुलैया की तरह लग गाँव की गलियों के जाल को समझकर नक्शा तैयार किया गया और शुरू हुआ घरों में जाने का सिलसिला | कोई घर ऐसा न था जिसने चाय न पिलाई हो और कुछ घर के लोग  खाना खिलने के लिए पीछे ही पड़ गए | पर समय कम था और काम ज्यादा | लगातार घर के दरवाजे खटकाते ही चले गए और सूरज की अंतिम किरण भी अब डूब चुकी थी और सर्वे चल ही रहा था | अब लोग यह कह रहे थे रुक जाओ भाई! रात हो गयी है सुबह चले जाना, पर मन तो मन ही है की मानता ही नही और अँधेरे में निकल पड़े | भगवान् चारो खाने चित नही करता किस्मत सही थी की वही ऑटो वाला मिल गया जिसने सुबह हमे गाँव में छोड़ा था | हमे देखकर रुक गया, फिर क्या था छोड़ गया हमे मुख्य मार्ग तक | बस मिलते ही राम रहीम सब भूल गए और आंख मुख्य शहर में आकर खुली !