Mangesh Nagpure – “असर” सर्वे के दूर दराज़ के गाँव

mangesh-jpg2“असर” भारत का शिक्षा के क्षेत्र में किया जाने वाला सबसे बड़ा वार्षिक सर्वेक्षण हैं जो कि आम नागरिकों द्वारा किया जाता है। वर्ष 2014 में असर सर्वे का 10 साल का सफ़र पूरा हुआ l इन 10 वर्षो के सफ़र में मुझे अवसर मिला 9 वर्ष असर में योगदान देने का । मेरा यह सफ़र वर्ष 2006  से शुरू हुआ जिसमें पहली बार मैंने मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के लिए एक स्वयंसेवक के रूप में भाग लिया l साल दर साल कहीं मास्टर ट्रेनर तो कहीं निरीक्षक के रूप में हिस्सा लिया l वर्ष 2012 में एक ज़िम्मेदार  असर एसोसिएट के रूप में मध्यप्रदेश के लिए कार्य करने की ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी गई।

हमारे भारत देश में विविधता में एकता दिखाई देती हैं l हर प्रान्त की बोली -भाषा, खान-पान, रहन-सहन एवं गाँव की बसाहट भी बिलकुल अलग-अलग पाई जाती है l मेरे इस 9 साल के सफ़र में असर सर्वे हेतु मैंने भारत के अनेक हिस्सों की यात्रा की और भारत की विविधता में एकता को परखा | साल दर साल मुझे हमेशा यहाँ कुछ नया सीखने के साथ एक अलग सा जोश और जूनून रहा है ! असर सर्वेक्षण की अपनी अलग- अलग चुनौतियाँ होती हैं l उन चुनौतियों का सामना करने का हर असर में हिस्सा लेने वालो का अपना एक अलग अंदाज होता है l सर्वे की प्रक्रिया में मोनिटरिंग और रीचेक यह दो काफी महत्वपूर्ण प्रक्रिया हैं जिससे सर्वे की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने में काफी मदद मिलती है l सर्वे की इस प्रक्रिया में कोई पहले काम करता हैं तो कोई सर्वे करने के बाद | सर्वे का गाँव पास का हो या दूर का, हमारे स्वयंसेवकों  ने सुदूर के गाँव तक पहुँचकर दिखाया था अब बारी मेरी थी | दोस्तों ! जहाँ हमारे ज़ाबाँज  स्वयंसेवक सुदूर गाँव तक  पाये हैं  ऐसा एक अनुभव मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ |

मैं वर्ष 2013 में उमरिया जिले के मानपुर ब्लाक के मल्लारा गाँव में गया था जो कि  जिले से लगभग 140 की. मी. दूर था | गाँव तक पहुँचने के लिए बाँधवगढ़  राष्ट्रीय उद्यान के (टायगर रिझर्व)mangesh के क्षेत्र को पार करके जाना था l रास्ता ख़राब होने की वजह से काफी देरी से गाँव में पहुँच पाए थे, इसलिये लोटने में देरी हुई थी l यह गाँव ज्यादा दूरी पर होने के कारण मैंने रीचेक के लिए चुना था ताकि गुणवत्ता बनी रहे | हमारे स्वयंसेवक ने दिशा निर्देश के अनुसार सर्वे सही तरीके से किया था और जिम्मेदार स्वयंसेवक होने का अहसास दिलाया था |

रीचेक होने के पश्चात गाव से 40 की.मी. की दूरी तय करने के बाद नाकाबंदी हो गई थी | जब मैं और मेरे साथी जो कि असर पार्टनर के प्रमुख थे, अरुण वाजपयी जी ने पूछा की नाकाबंदी क्यों है तो पता चला कि टायगर रिझर्व के क्षेत्र में शेर के द्वारा  किसी इंसान को मारने की वजह से नाकाबंदी हुई थी | यह सुनकर दिल की धड़कने तेज हो गई – ना तो जा सकते थे और ना ही लौट सकते थे क्योंकि आगे अँधेरा हो चुका था |  मात्र हम तीन लोग, मैं, मेरा साथी और फोरस्ट से चयनित गार्ड | बस मेरा होसला यहाँ बना  रहा  क्योंकि मेरे साथ कोई साथी था | 7 बज गये पूरा जंगल शांत बस कीड़ो के चिल्लाने की आवाज कान में सुनाई दे रही थी | मनोबल टूट रहा था वहाँ  ना कोई रहने की जगह ना खाने का ठिकाना l गार्ड के साथ बातचीत का सिलसिला चालू हो गया और असर की प्रक्रिया, गाँव जाने का मकसद और सर्वे का महत्व समझाने लगा | साथ ही मदद के लिए गुजारिश भी करने लगा | आखिरकार मैं सफल हुआ | गार्ड हमारे साथ बाइक पर चलने के लिए तैयार हो गए | गार्ड अलग – अलग आवाज़ें निकालने लगा ताकि कोई जानवर हो तो हमला न करे ।आखिर में टायगर रिझर्व के क्षेत्र को गार्ड ने पार करा ही दिया ! सलाम उस गार्ड का जो असर सर्वे की इस प्रक्रिया में प्रत्यक्ष  एवं अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर एक जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज अदा किया l मुझे गर्व हैं कि मैं असर सेण्टर का हिस्सा हूँ |

आप भी असर का हिस्सा बनिए और देश के हित में होने वाले इस महत्वपूर्ण कार्य में भाग लीजिये !

Mangesh Nagpure,

ASER Team, Madhya Pradesh