लड़कियां कुछ भी कर सकती हैं… एक लड़की ऐसी भी

Sneha Dash

ASER Team, Odisha

sये कहानी है एक लड़की की | एक लड़की जो बहुत चुलबुली है | कठिन से कठिन काम भी उसके लिए आसान है | हमेशा हंसी उसकी सूरत पर होती है | एक लड़की जो गाँव की लाडली है , जिसको गाँव के सारे लोग जानते हैं और सब लोग उसको दीदी बुलाते हैं | बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक, वह सबकी दीदी है|

असर सर्वे के दौरान मैं एक ऐसी लड़की से मिली और यह मेरा सौभाग्य है !  यह लड़की प्रेरणा दाई है, उस गाँव के  सर्वे को आसानी से और अच्छे से ख़त्म करने की ख़ुशी उसको ज्यादा थी | सिर्फ इतना ही नही, उस गाँव में जितने अच्छे पढ़ने वाले स्तर के बच्चे थे, वे उस लड़की की वजह से ही थे |

सर्वे के समय जिस घर में हम जाते, बच्चों से मिलते और टेस्टिंग के बाद जो पढ़ाई का स्तर आता, उसी समय उस लड़की के बारे में घर वाले बताते थे | जब हम ट्यूशन के बारे में बात करते तब भी उस लड़की की बात आती थी |

अभी तो आप को भी पता चल गया होगा कि वह लड़की, दीदी ही गाँव के बच्चों को पढ़ाती है | आप सोच रहे होंगे की वो लड़की और लोगों की तरह होगी, जो ट्यूशन से पैसा पाती होगी | आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि यह लड़की ५ साल तक बच्चों को बिना पैसा का पढ़ाई |

नहीं, वो लड़की थोड़ी अलग है !s-2

सर्वे के समय जिस भी घर हम जाते थे, उस घर में उस लड़की की बात होती थी | मुझे उससे मिलने का बहुत मन हो रहा था | कुछ घर के सर्वे के बाद मैं उस लड़की के घर गई | मेरे मन में कई सारे सवाल उठ रहे थे | मैं उसको और दबा नहीं सकी | बात चीत के दौरान मैंने उससे कुछ पुछा –

आप को इस गाँव में सब लोग जानते हैं और आपकी बहुत तारीफ़ भी करते हैं | आप सारे बच्चों को पढ़ाती हो और बच्चों के पढ़ाई का स्तर भी अच्छा है|

हंसकर – हाँ पढ़ाती थी, अब नहीं | अभी मेरी बहन पढ़ाती हैं | बच्चों के पढ़ाई का स्तर अच्छा करने के लिए बहुत  मेहनत करना पड़ता हे |

आपने बच्चों को कबसे पढ़ना शुरू किया ?

मैं जब इंटर में पढ़ रही थी | ऐसे नियमित नहीं पढ़ाती थी | गर्मी की छुट्टियों में पद्धति थी |

हमने सुना है की आप बच्चों के पीछे भागते थे उनको पढ़ाने के लिए | इसके बारे में बताईये.

हाँ !  छुट्टियों में मैं घर पर बोर हो थी | तब मैंने बच्चों को पढ़ाने का निश्चय किया | मैं गाँव में घूम बच्चों को पढ़ाती थी | बाद में धीरे – धीरे अभिभावक बच्चों को लेकर मेरे पास आने लगे |

क्या आप पढ़ाने के लिए कुछ पैसा लेते थे ?

नहीं | मैं नियमित पढ़ाती नहीं थी |

फिर क्या हुआ ?

इंटर के बाद ग्रेजुएशन के समय भी में छुट्टियों में ऐसे ही पढ़ाती थी |

आप चाहती तो नियमित रूप से पैसा लेकर पढ़ा सकती थीं | आपने ऐसा क्यों नहीं किया ?

गाँव में यातायात का साधन अच्चा नहीं है | कॉलेज आने जाने में बहुत समय लग जाता है इसीलिए मैं नियमित नही पढ़ा पाती हूँ |

आप इतना दूर (गाँव से रोड तक) पहले पैदल जाती थी फिर बाद में साइकिल से | वापस आते समय शाम हो जाती होगी, आप को कोई मुश्किल नहीं होती थी?

हंसकर बोली – नहीं कोई मुश्किल नहीं | गाँव के सारे लोग मुझे जानते हैं | कितनी भी देर हो रस्ते में मुझे कोई कुछ बोलता नहीं |

अभी आप आगे बच्चों को पढ़ाने का क्या सोची हैं ? 

अभी १ साल से मेरी बहन पढ़ाती हे | अभी उसको सारे बच्चे १०० रूपया देते हैं |

अपने परिवार के बारे में बताएँ |

हम ३ बहने हैं | सब कॉलेज में पढ़ रहे हैं | मेरे पिता खेती में काम करते हैं |

आगे का क्या प्लान है ?

अब तो ग्रेजुएशन ख़त्म हो गया | अभी में २-३ महीने के बाद अपने गाँव के पास एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने का सोच रही हूँ |

उस लड़की के बारे में इतना कुछ जानने के बाद बहुत अच्छा लगा | अक्सर माता – पिता अपने बच्चों को अच्छा बनाने के लिए कितना कुछ करते हैं | पर ऐसे भी बहुत बच्चे हैं जो अच्छाई के रास्ते पर चलना खुद सीख लेते हैं | ऐसी दीदी को हर गाँव की जरूरत है | अगर हर गाँव से ऐसी लड़कियां निकलेंगी तो बच्चों की पढ़ाई जरूर अच्छी होगी | यह मेरा विश्वास है !