“एक अवधारणा – गाँव में जाना मतलब काले पानी की सजा”

Ramkrishan Choudhary

ASER Team, Rajasthan 

पिछले 5 वर्षों से असर में कार्य करते हुए राजस्थान व भारत में बहुत-सी ऐसी जगह यात्रा करने का मौका मिला है जहाँ शायद ही कभी जाना होता | इसी असर यात्रा के दौरान इस वर्ष राजस्थान के धौलपुर जिले का असर सर्वेक्षण करवाने के दौरान हुआ एक अनुभव मैं आप लोगों के साथ शेयर करने जा रहा हूँ |

धौलपुर में असर सर्वेक्षण कार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के सहयोग से किया जा रहा था | जिला स्तरीय प्रशिक्षण के अन्त में मैं डाइट के प्रभारी के साथ मिलकर छात्राअध्यापकों को सर्वेक्षण के लिए गांवों में भेजने के लिए गाँव तय कर रहा था, तभी एक गाँव आया जो की बसेड़ी पंचायत समिति में था | जैसे ही उस गाँव का नाम आया वहाँ जाने के लिए कोई तैयार नही हुआ | जब मैंने इसका कारण पूछा cतो डाइट प्राचार्य व बाकी लोगों ने बताया की यह गाँव जंगल में है व डाकुओं का है और आज भी वहाँ चम्बल के डकैत रहते हैं | इसके साथ ही इस गाँव में किसी को भेजनें का मतलब उसको काले पानी की सजा देना है!

जब कोई भी इस गाँव में जाने के लिए तैयार नही हुए तो मैंने तय किया कि इस गाँव का सर्वेक्षण मैं खुद करने जाऊंगा |  मुझे भी सभी लोगों ने मना किया कि आप कोई दूसरा गाँव क्यों नही ले लेते हो | इस पर मैंने उनको समझाया कि हम गाँव इसलिए नहीं बदल सकते हैं क्यूंकि यह हमारी प्रक्रिया को प्रभावित करता है |

मैंने तय किया और यात्रा के लिए बाइक की व्यवस्था की व 2 छात्राअध्यापकों को बड़ी मुश्किल से समझाकर अपने साथ लिया | उनको समझाया कि मैं चल रहा हूँ, आपको कुछ नहीं होने दूंगा | सुबह जल्दी ही तैयार होकर हम निकल पड़े अपने नए सफ़र पर कुछ नए सवाल मन में लिए | गाँव में जाकर हमनें मुखिया जी से व गाँव के ही 2-3 शिक्षकों से सम्पर्क किया और उनको हमारें आने का उद्देश्य बताया | जब हमें सर्वेक्षण की अनुमति मिल गई तो मैंने सबसे पहले गाँव के प्रति लोगों की अवधारणा बताते हुए गाँव वालों से यही पूछा कि हम लोग कब तक आपके गाँव से निकाल जाए जिससे हमें कोई परेशानी नहीं हो? मुझे शिक्षक व मुखिया जी से यह सुनकर बहुत अच्छा लगा कि हम किसी भी समय जा सकते हैं, रात में सफ़र करने में भी अब कोई समस्या नहीं होगी | img_7776इसके साथ ही यह भी बताया कि आपने जो हमारे गाँव के बारें में सुना है वह सही सुना है – यहाँ आज से 10 साल पहले यही हुआ करता था | किसी सरकारी कर्मचारी को सजा देने का मतलब था उसका यहाँ ट्रांसफर कर देना | उन्होंने बताया कि इस गाँव में आने जाने के लिए कोई साधन नही था व यहाँ डकैत हुआ करते थे | लोगों का अपहरण करके यही रखा जाता था | पहले गाँव तक आने जाने के लिए या तो पदयात्रा करनी पडती थी या फिर ऊंट की सवारी, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है | अब गाँव तक पक्की सड़क बन गई है, गाँव का ग्राम पंचायत एक आदर्श ग्राम पंचायत है | इसके साथ ही गाँव के लोगों ने जो राजस्थान की परम्परा रही “अथिति देवों भव” साकार करते हुए हमें बिना खाना खाएं आने भी नही दिया | जब हम गाँव से निकल रहे थे तो उन लोगों ने बोला कि अगर आपको कोई भी समस्या हो तो हमें टेलीफोन कर देना |

इन्ही सभी प्यारे अनुभवों को अपने साथ लिए हम वहां से सर्वेक्षण पूर्ण करके धौलपुर के लिए निकल गए | रास्ते में साथ गए छात्राअध्यापकों की खुशी चहरे पर साफ़ दिखाई दे रही थी और उनका यही कहना था की आपका बहुत – बहुत शुक्रिया जो आपने जिद कर हमें ऐसी जगह लाया व हमारी अवधारणा जो इस गाँव के प्रति बनी हुई थी उसको अपने से देखने का अवसर दिया |