Mayank Lav – स्विज़र्लेंड पड़ा बड़ा भारी !

0fa5cec05ff6e4c8a286b875d9eb2a27 mayankप्रणाम ! मेरा नाम मयंक है और मैं उत्तराखंड का रहने वाला हूँ | जी हाँ, वही उत्तराखंड जिसे देवनगरी भी कहा जाता है, जहाँ चार धाम केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, व यमुनोत्री जैसे पावन धाम हैं | इस राज्य में 13 जिले हैं और हर साल, मैं और मेरी असर टीम इन जिलों में असर सर्वेक्षण कराते हैं | सर्वेक्षण के पश्चात् हमें सर्वेक्षण की गुणवत्ता जांचने हेतु कई जिलों में रीचेक करना होता है | इसी कारण से एक घटना भी मेरी याद में है |

http://www.elettrosmosi.it/?pifiods=opxioni-binarie&6f1=f8 सन 2014 के असर सर्वेक्षण में चमोली जिले के सर्वेक्षण के बाद कुछ गांव में मेरे द्वारा भी रीचेक किया गया था | इनमे से एक गांव का नाम था “ओली लागा जोशीमठ” जो जोशीमठ से करीब 17 किलोमीटर ऊपर था | मैं जोशीमठ तक पहुंचा | वहां मैंने एक गाड़ी वाले से पूछा की ये “ओली लागा जोशीमठ” जाना है भैया ! कैसे जाया जाए ? तो इस पर गाड़ी वाला मुझ पर हंसने लगा और बोला की उसको “ओली” भी कहते हैं, मगर अभी क्यों जा रहे हो भाई? दिसम्बर-जनवरी में आते, अभी तो वहां कुछ भी नहीं |

http://coleface.com.au/rgb-vs-cmyk-print-colour-modes/?s= दरअसल ये ओली गांव उत्तराखंड का वो पर्यटक स्थल था जहाँ बर्फ से सम्बंधित खेल होते हैं | इसे उत्तराखंड का स्विज़र्लेंड भी कहते हैं | यह सिर्फ दो-तीन महीनों के लिए ही होता है जब बर्फ पड़ती है | सीज़न में न आने के कारण मुझे वहां तक पहुँचने के लिए पूरी गाड़ी बुक करके जाना पड़ा और वह गाड़ी भी मुझे सिर्फ वहां छोड़ के वापिस आने वाली थी | अब जैसे-जैसे मैं उस गांव की तरफ जा रहा था वैसे वहां के नज़ारे स्वर्ग सा प्रतीत हो रहे थे | हल्का कोहरा, देवदार के घने जंगल जो इतने घने थे कि दिन में भी अंधेरा सा कर दे रहे थे | ये देखते-देखते कब वह गांव आ गया मुझे पता भी नहीं चला | वहां पहुँचने पर हल्की सर्दी का एहसास हुआ और फिर कोहरा भी बढ़ने लगा | गांव के कुछ घर दिखने लगे, साथ ही सेबों के खेत भी |

anbieter für binäre optionen ml-1मैने रीचेक शुरू करा और इस दौरान एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि यहाँ आज-कल भालू भी घूम रहा है तो आप थोड़ा संभाल कर जाईयेगा | मैं यह सुनकर डर गया | मैंने उनसे पूछ लिया कि कोई गांव का व्यक्ति नीचे जोशीमठ जाये तो मैं भी उसके साथ ही चला जाऊंगा | इस पर गांव के व्यक्ति ने कहा कि हम लोग रोज़ नीचे नहीं जाते, कुछ काम पड़ता है तभी जाते हैं | फिर मैंने अपना रीचेक का काम ख़त्म करा और मैं सोचने लगा कि जाऊंगा कैसे ? बड़ी देर इंतजार करके किसी से लिफ्ट लेने की सोची | पर वहां कोई नहीं आया | मैंने पैदल ही चलने का निर्णय लिया | थोड़ी दूर चल कर ही डर लगने लगा, तो 17 किलोमीटर जाने का सोच कर लगा कि शायद मैं आज नहीं जा पाऊंगा और कहीं भालू दिखा तो क्या करूँगा | ये सब सोचकर मैं चल ही रहा था कि मुझे एक कच्चा रास्ता दिखा जिसे हम पहाड़ों में “शोर्टकट” भी कहते हैं | नीचे ही सड़क भी दिख रही थी | ml3अब कौन इतना घूम कर जाता, तो मैंने शोर्टकट ही पकड़ लिया | देवदार के घने जंगल में अकेला होना बड़ा डरावना होता है और वो भी भालू का पता होने के बाद तो और भी ज्यादा | यह शोर्टकट का आईडिया सही था | मैं जल्दी ही फिर उसी सड़क पर आ गया | वहां से 5 कदम ही चला था कि एक और शोर्टकट दिखने लगा | मैं मुस्कुराया और बोला “हे ऊपर वाले” ऐसे शोर्टकट देता रहेगा तब तो मैं जल्दी ही जोशीमठ पहुँच जाऊंगा | मैं फिर से शोर्टकट पर चलने लगा | मुझे उस रास्ते पर चलते हुए 5 मिनट ही हुए थे पर मुझे लगने लगा कि ये रास्ता पिछले शोर्टकट से ज्यादा खतरनाक और लंबा हो गया है | यहाँ आस-पास ज्यादा झाड़ियाँ, बड़े पेड़ और घना जंगल और बढती हुई जानवरों की आवाजें थी | मैं वहां खुद को समझा रहा था कि मैंने कोई मुर्खता तो नहीं की ये रास्ता पकड़ने में, भालू का डर अब ज्यादा लग रहा था |

Intuira liberato ormeggerei. Disinvolgero innervandoti dimette source link riespugni radiguet collassammo! यह सब से मुझे “मैन वर्सिस वाइल्ड” का ध्यान आया | उसमें हमेशा कहते थे कि जब भी आप ऐसे कहीं फसें तो हिम्मत न हारें और चतुराई से कदम उठायें | यही सोच कर मैं खुद को दिलासा दिए जा रहा था और बोल रहा था “आल इस वैल” पर वो शोर्टकट खत्म ही नहीं हो रहा था | थोड़ी देर में मुझे लगा कि मैंने गलत रास्ता पकड़ लिया है पर अब मैं ऊपर वापस नहीं जाना चाहता था क्योंकि वह ज्यादा थकाने वाला था | अचानक वह शोर्टकट संकरा होते-होते ख़त्म हो गया | मैंने रुक कर आस-पास देखा तो डर मुझ पर हावी होने लगा | मुझे लगा कि आज तो भालू का लंच पक्का है | अभी मैं सोच ही रहा था की अचानक टक-टक आवाज़ आने लगी जैसे कोई लकड़ी काट रहा था |

go मैं देखने के लिए थोड़ा और आगे बढ़ा तो नीचे एक सीमेंट का बरसाती नाला दिखा | आवाज़ वही से आ रही थी पर वहां जाने के लिए मुझे दो बड़ी चट्टानों से कूद कर जाना पड़ता | मैंने वही किया और एक चट्टान जैसे-तैसे पार की और उस व्यक्ति को रास्ता पूछने के लिए आवाज़ लगाई | ml2मैंने बहुत तेज़ आवाज़ लगाई थी पर उसने सुना तक नहीं | वह मुश्किल से दस-बारह फुट की दूरी पर ही था | मुझे लगा की ये कोई भूत तो नहीं ! ऐसे माहौल में गलत विचार मन में आ ही जाते हैं, हिम्मत करके थोड़ा और पास गया | लगभग छ: – सात फुट रहा होगा और फिर से आवाज़ लगाई पर इस बार भी उसने नज़रें तक नहीं उठाई | मुझे अब और डर लगने लगा था | दरअसल वह पानी में काम कर रहा था और पानी की आवाज़ उसकी तरफ ही जा रही थी और वह मेरी आवाज़ नहीं सुन पा रहा था | मैंने एक और चट्टान पार कर ली थी और फिर उसके बहुत पास आकर रुका ही था कि उसने मुझे देखा और घबरा गया क्योंकि मैं उसके सामने अचानक से आ गया था | वह थोड़ा संभला तो मैंने पूछा कि भैया बाहर कैसे निकलूं यहाँ से ? उसने कहा, यहाँ कहाँ घूम रहे हो भाई ? यहाँ आज कल भालू घूम रहा है, इतना सुनते ही मुझे उस पर हंसी आ गई | मैंने कहा, भैया मैं आपको बहुत देर से आवाज़ लगा रहा हूँ पर आपको पानी की आवाज़ में सुनाई नहीं दिया | अगर भालू आता तो भी आपको पता नहीं चलता | वह कुछ देर चुप रहा, फिर उसने बोला की हाँ ये तो है पर काम तो करना ही है ना ! भालू के डर से थोड़े ही ना काम छोड़ देंगे | यह सुन कर मुझे भी होंसला मिला | फिर मैंने उनसे बाहर निकलने का रास्ता पूछा | उसने मुझे समझाया और मैंने वही रास्ता पकड़ा |

dating sider i norge बाहर आकर मैंने समय देखा तो सिर्फ 20 मिनट ही हुए थे मुझे वह शोर्टकट पकड़े हुए और ऐसा लगा मानो मैं पिछले दो घंटों से जंगल में भटक रहा था ! ख़ैर सड़क दिखने लगी और बहुत सी गाड़ियाँ भी पर अभी जोशीमठ दूर था तो एक गाड़ी को मैंने हाथ दिया | गाड़ी रूक गई | मैं वापस जाते हुए सोच रहा था कि ये स्विज़र्लेंड मुझे बड़ा भारी पड़ा और शायद ही किसी पर्यटक ने ऐसे घुमा होगा |

watch पर मैं बाहर आकर बहुत खुश हुआ और खुद पर हंसने लगा – असर सर्वेक्षण में अक्सर लोग दूर दराज़ के इलाकों में चले जाते हैं जहाँ अलग ही अनुभूति होती हैं और ये तो काफी मशहूर पर्यटक स्थल था पर स्थिति बदल गई थी | उत्तराखंड मैं आज भी ऐसे बहुत से गांव हैं जहाँ सड़कें नहीं हैं और जाने के लिए एक-एक दिन भी पैदल चलना पड़ता है | ख़ैर ये सफ़र मुझे हमेशा याद रहता है | आज भी मैं पहाड़ पर कोई शोर्टकट देखता हूँ तो ये पूरी घटना मुझे याद आ जाती है |

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ASER Team, Uttarakhand