असर की यात्रा – मरुस्थल में बाढ़ और जीवन दर्शन !

Dharam Pal

ASER Team, Rajasthan

“असर” नाम में ही काम छुपा है ! यात्रा करना अपने आप में एक चुनौती है और उसके बाद काम भी करना है | ऐसा ही है हमारा असर ! इस वर्ष असर सर्वे में काम को लेकर मैं काफी उत्साहित था | असर सर्वे मेरे लिए नया था और जाहिर सी बात है कि लीक से हटकर जब कुछ नया सीखते हैं तो उसका आनंद कुछ और ही होता है ! काम था असर सर्वे के लिए डाइट पार्टनर्स से मिलना और सर्वे की तारीख को अंतिम रूप देना |

काम अभी शुरू ही हुआ था कि बरसात का आगमन हो गया | वैसे राजस्थान में ओर बरसात ! इसके बारे में सब जानते हैं की राजस्थान में बरसात का मौसम आता जरूर है लेकिन उसमें बरसात कम ही होता है | यदि पश्चिमी राजस्थान (मरूस्थल) की बात करें तो वहां तो बरसात का मतलब होता है कि घरों की छत से मकान के नीचे तहखाने में बनाया हुआ पानी का टैंक जो छत के पानी से भर जाए ताकि पूरे वर्ष पानी पिया जा सके | बस पश्चिमी राजस्थान (मरूस्थल) में बरसात का मतलब इतना ही है !img_9892

चूँकि नया काम था मुझे रोज कुछ नया सीखने को मिल रहा था जिससे मैं काफी उत्साहित था | मैंने एक दिन दो जिलों (नौगोर और जोधपुर) की योजना बनाई | सुबह जल्दी ही नौगोर के लिए निकल पड़ा और वहां से फ्री होकर जोधपुर के लिये रवाना हो गया | चूँकि ट्रेन में आरक्षण तो था नहीं इसलिये जनरल डिब्बे में सवार हो गया | उसदिन दिनभर से बरसात जारी थी लेकिन नौगोर में कम थी | ट्रेन जोधपुर से लगभग 50 किलोमीटर पहले रूक गई | मैंने सोचा क्रासिंग होगी | वह क्रासिंग नहीं थी | बाद में पता चला की जोधपुर में 2 घंटे में 6 इंच पानी बरसा था और बरसात अभी जारी है | चारों तरफ पानी ही पानी हो गया था, जिससे ट्रेन जोधपुर से पहले ही रूक गई |

आखिरकार 5 घंटे लम्बे इन्तजार के बाद शायद आगे से ट्रेक क्लियर हो गया होगा इसलिये ट्रेन आगे निकल गई | मैंने सोचा चलो देर आए दुरुस्त आए ! आत्मविश्वास से कही कहावत थोड़ी ही देर चली और ट्रेन जोधपुर छावनी पर जाकर रुक गई | सूचना मिली कि आगे पानी बहुत ज्यादा है, ट्रेन आगे नहीं जएगी | जोधपुर उतरने वाली सवारियां उतरने लगी | मैं भी उतर गया और जाने लगा | आगे गया तो देखा रोड और जोधपुर छावनी स्टेशन पर घुटनों तक पानी बह रहा था | मैं  वहां से उलटे पांव वापस आ गया |

कुछ देर सोचने के बाद जब देखा कि सभी लोग निकल रहे है तो मैं भी निकल गया | वाकई में घुटनों तक पानी था | सभी लोग लाइन बनाकर चलने लगे | मैं भी उसी लाइन में निकल पड़ा | हम लोग धीरे-धीरे चल पड़े और डर भी था कि कहीं कोई खड्डा न हो ! चलते-चलते रात के 12:30 बज गए थे | जैसे तैसे पानी ख़त्म हुआ ही था कि अब टैक्सी मिलना मुश्किल हो गया | कही भी टैक्सी नजर नही आ रही थी | अचानक एक मोड़ पर एक टैक्सी दिखाई दी | टैक्सी वाला सो रहा था | मैंने उसे जगाया | बंदा जाने को तो तैयार तो हो गया लेकिन पैसा इतना माँगा कि जैसे सारे दिन से उसे मजदूरी नहीं मिली हो | मोल भाव करने की मेरी हालत भी नहीं थी | जैसे तैसे वह तैयार हो गया | लेकिन अभी समस्याऔ ने मेरा पीछा छोड़ा नहीं था ! क्योकि जब होटल पहुंचे तो होटल वाला भी घोड़े बेच कर सो गया था | वह जगने का नाम ही नहीं ले रहा था | काफी दरवाजा खटखटाने के बाद वह जागा, तब जाकर रूम मिला | अब खाना, मुख्य जरुरत थी | मैंने होटल वाले से बात कि तो बोला सर पानी पी लों और सो जाओ |

ECE study के दौरान असर के बारे में कुछ ना कुछ नई कहानी जरुर सुनता था और सोचता था कि कितना कठिन है – इतनी यात्रा और इतनी मुश्किलें | लेकिन जब मैंने असर शुरू किया तो एक बार भी दिमाग में नहीं आया कि में भी उन्ही कठिनाइयों से जुड़ गया हूँ | इसी के साथ मैं अपने आप को गोरान्वित भी महसूस कर रहा था कि इस बार एक नई कहानी मेरे साथ भी जुड़ गई !

ये था उस दिन का एडवेंचर | उस दिन सीखना थोडा ज्यादा हो गया | लेकिन सीखा जो बहुत अच्छा था कि यात्रा के दौरान आपके पास खाने व पीने की सामग्री जरुर होनी चाहिए | इस के साथ ऑनलाइन सिस्टम का बहुत-बहुत शुक्रिया कि मैंने उस दिन होटल ऑनलाइन ही बुक कर ली थी | अन्यथा यह सोचकर ही डर लगता है कि रात 1 बजे मै कहाँ जाता |

इसी के साथ कुछ सवाल भी मेरे जहन में थे जिनके बारे में हम आम नागरिकों, सरकार और जनप्रतिनिधियों को सोचना चाहिए | हम ये मानकर चलते है कि हमारे यहाँ बरसात कम होती है और इसी कारण हम इस तरफ ध्यान ही नहीं देते हैं, आपदाओं के प्रति सचेत नहीं रहते हैं | जोधपुर जैसा शहर जहाँ पानी निकास की समुचित व्यवस्था नहीं है | उस बरसात से जो नुकसान हुआ उसको मापना कठिन है |

असर यात्रा में हुआ यह अनुभव मुझे हमेशा याद रहेगा और मुझे प्रेरित करता रहेगा |