Anurag Tripathi – असर का मुझ पर असर!

14508493_888932631251406_557516110_nपिछले कुछ दिनों से चल रहे ASER (एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट) के सर्वे की संपूर्ण जिम्मेदारी हमारी संस्थान को मिली है | पिछले एक सप्ताह से चल रहे इस कार्यक्रम के अगले चरण में अब बारी आई है सिद्धार्थ नगर और बलरामपुर जिले की | इन जिलों के गांव में जाकर हमारे स्वयंसेवी वहाँ के 3 से 16 वर्ष के बच्चों से मिलकर उनकी शिक्षा की स्थिति की वास्तविकता जानने की कोशिश करेंगे। 40 स्वयंसेवकों को 3 दिन का प्रशिक्षण देने के पश्चात दोनों जिलो के गाँवो में भेजा जा रहा है तथा उनसे सर्वे कराया जा रहा है | सर्वे में 3 से 16 वर्ष के बच्चों की जानकारी ली जा रही है कि वो कौन सी कक्षा में पढ़ते है? किस प्रकार के विद्यालय में पढ़ने जाते हैं – सरकारी या प्राइवेट और टेस्टिंग टूल के द्वारा उनकी पढाई के स्तर की जाँच की जा रही है | यह सर्वे कराने का मुख्य उद्देश्य वहाँ की वास्तविक स्थिति को जानकर उसमें सुधार हेतु क्या किया जाये उस पर चर्चा करना और उसे आगे बढ़ाना है | फ़िलहाल तो लगातार दोनों जनपदों में मैं पिछले 7 दिनों से लगातार भागदौड़ कर रहा हूँ किंतु आज मैं स्वयं अपने स्वयंसेवियों के साथ गाँव में गया और गाँव के बच्चों का सर्वे किया तथा स्वयं सर्वेक्षण का हिस्सा धरातल पर बना ।

जो स्थिति आज मैंने जमीनी स्तर पर देखी वह वाकई काफी चिंताजनक है | इतना सब होने के बाद भी आज मेरे जनपद के 5वी कक्षा के बच्चे गणित में सिर्फ अंक और संख्या और अंग्रेजी में सिर्फ  छोटे लेटर ही पहचान पा रहे थे | हिंदी जो हमारी मातृभाषा है उसमें सिर्फ अक्षर पहचान तक की ही जानकारी रखते है, जबकि मैं तो सोचता था कि यह कहानी, घटा, भाग बच्चे आसानी से कर ही लेंगे | यह  स्थिति मेरी सोच से बिलकुल विपरीत थी | बहुत अफ़सोस होता है कि हमारा आज जो हमारा कल है वही अगर आगे नहीं बढ़ेगा तो हम कैसे समझ ले की हमारा देश आगे बढ़ेगा।
आज भी ग्रामीण बच्चे स्कूल में जाते तो हैं लेकिन 8वी कक्षा तक पहुँचने के बाद भी अपना नाम तक नहीं लिख पाते | मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगा कि जहाँ अभिभावक जानकार है वहाँ की स्थिति थोड़ी सही होती है और बच्चे आगे भी पढ़ते है वर्ना वही से उसकी पढाई ख़त्म और दिल्ली और मुम्बई जैसे महानगरों में पैसा कमाने के लिए भेज देते है | जब शिक्षा कम होगी तो रोजगार भी उसी स्तर का मिलेगा और अगर शिक्षा नहीं होगी तो वह किसी मील का मजदुर बनकर ही सीमित रह जायेगा ।

अब समय आ गया है कि प्राथमिक शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव हो | सभी बच्चों को उनके स्तर की शिक्षा दी जाए और वहाँ तक दी जाए जहाँ से वे अपने रास्ते खुद बना ले और जिंदगी में सफल हों | अगर हम आज नहीं सोचे तो कल बहुत देर हो जाएगी और हमारे समाज के बच्चे बहुत पीछे रह जाएंगे | अगर हमें आगे आना है तो समाज के अपने आस-पास के सभी बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा पर ध्यान देना होगा । वरना वही होगा –

एक परिंदे का दर्द भरा फ़साना था ,
टूटे थे पंख उड़ते हुए जाना था ,
तूफान तो झेल गया मगर अफ़सोस
वही डाली टूटी जिसपर उसका आशियाना था।

आज नहीं अभी नहीं तो कभी नहीं ! आइये और प्राथमिक शिक्षा को लिए हम सब कदम उठाएं | कई तरह से हम इस मुहिम में साथ दे सकते हैं | पहला खुद प्राथमिक विद्यालय में अगर हर जानकार व्यक्ति सिर्फ एक घंटा समय दे और बच्चों को पढ़ाये तो बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावक में सुधार आएगा । और अगर ऐसा 10 लोग करने लगे एक गांव के तो हर दिन बच्चों को अच्छी शिक्षा भी मिलेगी साथ ही उनके अभिभावक भी जागरूक होंगे, क्योंकि आप उसी गाँव के रहेंगे और बच्चा भी उसी गांव का रहेगा तो निश्चित तौर पर सभी की सोच में बदलाव आएगा| आज मैं विशेष धन्यवाद असर के राज्य समन्वयक श्री संदीप शर्मा जी को धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने गाँव में चलने का मुझसे अनुरोध किया और वहां की शिक्षा की वास्तविक स्थिति देखने को कहा, वरना शायद आज ये अनुभव मुझे प्राप्त नहीं हो पाता | असर से जुड़ने पर यह अनुभूति हुई है कि हम सब को आगे आना होगा और व्यवस्था परिवर्तन का हिस्सा बनाना होगा!

हम बदलेंगे जग बदलेगा
हम सुधरेंगे जग सुधरेगा ।
जय हिन्द जय भारत !

– अनुराग त्रिपाठी, संस्था अध्यक्ष, नवोन्मेष साहित्ययिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थान, सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश

42 thoughts on “Anurag Tripathi – असर का मुझ पर असर!”

  1. शुक्रिया अनुराग जी.. अपने अनुभव को हमारे साथ साझा करने के लिए | मैं आशा करता हूँ कि आपका सहयोग हमें भविष्य में भी मिलता रहेगा !!

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