Rohit Kumar – आज भी याद है वह “असर का सफर”

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enter site rkकारगिल के बारे में टी.वी.पर सुना था और जब वहां जाने का मौका मिला तो दिल में नई उमंग उमड़ पड़ी I यह उस  समय की बात है जब 2011 में अपने कुछ साथियों के साथ मैं वहां असर का सर्वे कराने गया था I

http://pialadunia.es/?espikoleto=que-preguntas-hacer-para-conocer-a-un-chico&67b=b5 पीठ पर बैग लिए मैं अपने साथियों के साथ कारगिल पहुंचा और वहां कॉलेज के विद्यार्थियों को ट्रेनिंग कराई तो पता चला कि मेरी मंजिल अभी 150 किलोमीटर दूर जांस्कर घाटी में है I मेरे साथ कश्मीर के दो साथी भी सर्वे कराने के लिए जा रहे थे  I कारगिल काफ़ी फ़ैला हुआ जिला  है I जांस्कर का कोई भी  विद्यार्थी कारगिल में नहीं पढ़ता था इसलिए हमें इस बात की चिंता सता रही थी कि इस इस दूर-दराज की घाटी में सर्वे करने कौन जाएगा I खैर, फिर भी सर्वेक्षण के लिए 9 स्वयंसेवक वहां जाने के लिए तैयार हो गए I

click जब हम बस स्टैंड गए तो पता चला की जांस्कर के लिए कोई भी बस नहीं जाती है I हमने टैक्सी वालों से बात की, वे जांस्कर जाने  के बहुत पैसे मांग रहे थे क्योंकि वहां सड़क ठीक नहीं है I काफ़ी बातचीत करने के बाद एक टैक्सी वाला मान गया परन्तु जब हमने उससे रात को सफर करने की बात की तो उसने जाने से इनकार कर दिया, “ रात को उस रोड पर सफर करना जोखिम भरा है और अगर कहीं गाड़ी रास्ते में फस गयी तो ठण्ड में समस्या हो जाएगी’ I  फिर हमने उसे समझाया कि कल हमें सर्वे करना है और हम लोग ज्यादा दिनों तक वहां नही रुक सकते I तब वह  मान गया और हम 10 लोग शाम को लगभग 6:00 बजे जांस्कर के लिए  रवाना हुए I

bonus opzioni सड़क की हालत बीच – बीच में बहुत खराब थी I  कई जगह सड़क पर पत्थर गिरे थे I हम सब मिलकर कड़कड़ाती ठण्ड में सड़क पर गिरे पत्थर को हटाते हुए आगे बढ़ते गए I  रात को कहीं ड्राईवर सो न जाए इसलिए हम उस को रात भर असर, प्रथम , और बच्चों के बारे में न जाने कितनी बातें सुनाई I सुबह लगभग  7:00 बजे  हम जांस्कर पहुंचे I  नाश्ता करने के बाद हम अपने – अपने  गाँव के लिए रवाना हो गए, जिनमें हमें सर्वे करना  था I   शाम को वहां हवा बहुत तेज चलती है और एक जगह तो बच्चे के हाथ से टूल ही उड़कर चला गया और उनको नया टूल देना पड़ा I

sitios para solteros ecuador सबने अच्छे से सर्वे  किया और वापिस आने लगे तो ड्राईवर ने बताया कि यहाँ डीजल नहीं मिल रहा है तो शायद यहाँ दो-तीन दिन रुकना पड़ेगा I  यह हमारी खुशकिस्मती थी की दूसरे दिन शाम को तेल की गाड़ी आ गई I   रात के 1:15 बजे हम “ source site Penzila Pass (Pensi Pass)”  पहुंचे जो कि समुद्रतल से लगभग 14000 फीट की ऊंचाई पर है I वहां हम सब ने  गाड़ी की लाइट में ग्रुप फोटो लिया I  रात को सभी होटल व ढाबे बंद हो गए थे और हमने डिनर नहीं किया था इसलिए हमें जोर की भूख लगी थी I करीब 2:30 बजे हम “रंगजोम’ पहुंचे और ड्राईवर ने एक ढाबे वाले को उठाया और पूछा कि क्या खाना मिलेगा ?  उसने कहा कि मैं  मैगी बना  सकता हूँ , हमने बोला ठीक है कुछ तो खिला दो I उस भूख में मैगी का स्वाद जब आज भी याद आता है तो मुँह में पानी आ जाता है !

http://bodowlaw.com/?biopeme=sito-opzioni-digitali&53d=ac सुबह जब हम कारगिल पहुंचे तो हम सबसे पहले  पुलिस स्टेशन गए क्योंकि हमारे दूसरे साथियों ने FIR करवा दी थी कि हमारे कुछ लोग जांस्कर गए थे और वापिस नहीं आये हैं I हमारे साथी हमें देख कर बहुत खुश हो गए और FIR वापिस ले ली I मुझे आज भी वो जांस्कर का सफर और वो  बहादुर सर्वेक्षक याद है जिन्होंने रात भर मुश्किल सफर करने के बाद भी दूसरे दिन सर्वे किया परन्तु  उनके चेहरे पर कोई थकान नहीं थी बल्कि ख़ुशी की लहर थी !

http://teentube.cz/?ertye=sitios-para-conocer-personas-en-internet&b67=89 Rohit Kumar

ASER Associate, Himachal Pradesh