चलते – फिरते

अब असर करने की गुंजाइश और बढ़ गई | यह क़स्बा, लोगों के हर छोटे – बड़े सामान मिलने के लिए बहुत था | यहाँ ग्रामीण खरीदारी करने पहुंचे थे | हम दोनों ने यह देखा और निश्चय किया कि ऑटो, टैक्सी और स्थानीय लोगों से गाँव के बारे में जानकारी हासिल करें | यही शायद उस समय हमारे लिए सबसे सही उम्मीद थी और हमने ऐसा ही किया

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Mayank Lav – स्विज़र्लेंड पड़ा बड़ा भारी !

असर सर्वेक्षण में अक्सर लोग दूर दराज़ के इलाकों में चले जाते हैं जहाँ अलग ही अनुभूति होती हैं और ये तो काफी मशहूर पर्यटक स्थल था पर स्थिति बदल गई थी | उत्तराखंड मैं आज भी ऐसे बहुत से गांव हैं जहाँ सड़कें नहीं हैं और जाने के लिए एक-एक दिन भी पैदल चलना पड़ता है | ख़ैर ये सफ़र मुझे हमेशा याद रहता है | आज भी मैं पहाड़ पर कोई शोर्टकट देखता हूँ तो ये पूरी घटना मुझे याद आ जाती है |

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Shyam Kolare – मेरा पहला असर – एक यादगार सफ़र !

यह नजारा जो हमने पहली बार असर सर्वेक्षण के दौरान देखा वह सबसे सुखद अनुभव था l वह दृश्य बहुत दिनों तक आखों के सामने घूमता रहा और मेरा पहला असर यादगार बन गया l इसके बाद हम यही सोचते थे की यूँही असर हर साल होता रहे और हमें नई-नई जगह घूमने का मौका मिलें!

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जब गाँव हमारा है तो नक्शा भी तो हम ही बनायेंगे

नक्शा बनाते समय शर्मा जी गाँव के अन्य साथियों को समझाते भी जा रहे थे कि भाई जब गाँव हमारा है तो नक्शा भी तो हम ही बनायेंगे !

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Jharkhand is a difficult state they said, but none told that it’s a sight to behold!

By Mansi Nanda, Research Associate, ASER Centre
Before this trip, Jharkhand was just another state for me. I’m glad I took the decision to go to there because now whenever I would think about nature, peace and clear skies, I’ll remember Jharkhand for it’s beauty, I’ll be reminded of the training centre and the room on terrace for the view, I’ll be reminded of the rock where we sat and saw the calm water, I’ll be reminded of everything that Jharkhand was: BEAUTY AT IT’S BEST.

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