यही है असर

उनमें से एक सर्वेक्षक ने अपना अनुभव इस तरह सांझा किया, “जब हम एक घर में गए तो घर वाले हमें अजनबी समझ कर हमारे कार्य पर संदेह करने लगे | बच्चे के नाम लिखने से लेकर बच्चे की टेस्टिंग तक उन्होंनें अपने मोबाइल से हमारा वीडियो बनाया | हमने देखा कि घर का सर्वेक्षण समाप्त होने के बाद घर वाले अचानक हमें चाय, बिस्किट तथा अन्य खाने के सामग्री हमारे सामने लाने लगे | हम भी चौंक गए कि यहाँ अब ऐसा क्या हो गया? अभी तो घर वाले संदेह कर रहे थे और वीडियो बना रहे थे अचानक इन्हें क्या हो गया | इस प्रश्न का उत्तर बाद में मिला | दरअसल उनके बच्चे ने टेस्टिंग के सारे सवालों का उत्तर सही दे दिया था | बच्चे के प्रदर्शन से घर वाले काफी खुश थे | हमारी जाँच करने की सामग्री उन्हें बहुत पसंद आई थी | यह कहना गलत नहीं होगा कि घर वालों पर भी असर का असर हो गया था |”

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