Akhilesh Richhariya – असर के गांव

akhilesh-richhariya-2असर सर्वे शिक्षा के क्षेत्र में गांवों में किया जाने बाला भारत का सबसे बड़ा बार्षिक सर्वेक्षण हैं | 9 वर्षों से मैं इस सर्वे में किसी न किसी रूप में प्रतिभागी रहा हूँ | असर सर्वे में एक जिले में तीस गाँवों का सर्वेक्षण किया जाता है | सुनने में यह एक छोटी संख्या लगती है लेकिन जो इन गाँवो का सर्वे करते हैं, उन्हें पता चलता है की यह छोटी सी संख्या मात्र नहीं है  | एक जिले में रेंडम रूप से गाँवों का चयन किया जाता है | कुछ गांव शहर से नजदीक तो कुछ गांव ऐसे जहां पहुँचने के लिए कोई साधन भी उपलब्ध नहीं होता – 5-5 की.मी. पैदल चलना होता है | कुछ गाँव ऐसे जहां जाने के लिए एक बस चलती है जो शाम को शहर से जाती है और रात भर गाँव में रुकने के बाद सुबह फिर शहर वापस आती है | लेकिन यहाँ मैं ऐसे गाँव की कहानी सुनाना चाहता  हूँ जहां लोग जाने से डरते हैं !  उस गाँव का इतना खौफ की उसी जिले का व्यक्ति वहां जाने को तैयार नहीं | यह गांव है राजस्थान के भारतपुर जिले का चोरगड़ी गांव |

2011 में असर एसोसियेट के रूप में मैंने राजस्थान मैं कार्य करना प्रारंभ किया | मुझे असर की पहली राष्ट्रिय कार्यशाला जो लखनऊ में आयोजित की गई थी वहां जाने का मौका मिला | बिलिमा मेम द्वारा एक सेशन लिया गया की हम गाँव कैसे चुनते हैं, सेम्पलिंग कैसे करते हैं आदि | इस सेशन में मैंने बहुत ध्यान से हिस्सा लिया | 2007 से हर वर्ष मैंने असर मास्टर ट्रेनर के रूप में असर प्रक्रिया में भाग लिया था और हर बार मेरे दिमाग में यही सवाल उठता था कि गाँवों का चयन कौन करता है ? कुछ गाँव इतनी दूर जहां जाना संभव नहीं, कुछ बड़े गांव तो कुछ छोटे गांव!  शायद इन सवालों के जवाब मुझे मिलने बाले थे जो सालों से मेरे मन मैं चल रहे थे और बो भी उन्ही से जो इन गांवों को चुन कर देते हैं !

बिलिमा मेम द्वारा बताया गया कि गांव का चयन PPS पद्धति के माध्यम से किया जाता है जो रेंडम रूप से एक जिले में 30 गाँवों का चयन करते हैं | उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी परिस्थिति (कुछ विशेष परिस्थतियों को छोड़ कर) में यह गाँव चेंज नही होंगे, उन्ही गाँव का सर्वे करना अनिवार्य है |

भरतपुर जिले में असर का जिला स्तरीय प्रशिक्षण संपन्न होने के बाद आखरी दिन स्वयंसेवकों को सर्वे के लिए गाँव दिए गए और मटेरियल दिया गया | दूसरे दिन सभी स्वयंसेवक सर्वे करने के लिए निकल गए | चोरगड़ी का सर्वे करने के लिए जो सर्वेक्षक जा रहे थे उनके पास नई बाइक थी | जैसे ही वे उस ब्लॉक में गए और उस गाँव का रास्ता पूछा तो लोग हैरान हो उठे | उन्हें  इस बात पर बहुत हैरानी थी सर्वेक्षक नई बाईक ले कर चोरगड़ी जा रहे थे | कई लोगों ने जब ऐसी बातें कहीं तो स्वयंसेवक डर गए और उस गाँव का सर्वे करने के लिए मना कर दिया !

मुझे लगा कि इस गाँव का सर्वे कैसे होगा? यह कोई विशेष परिस्थिति भी नहीं कि गाँव चेंज कराने के लिए मेम से आग्रह किया जाए| यह वर्ष असर एसोसियेट के रूप में मेरे लिए नया था और मैंने अपने मन मैं ठान लिया की कुछ भी हो जाय में असर की प्रक्रिया को पूरा जरूर करूँगा !  फिर क्या था, दूसरे ही दिन मैं उन्हीं स्वयंसेवकों के साथ, चोरगढ़ी के लिए निकल पड़ा | एक स्वयं सेवक ने बताया कि उसके चाचा वकील हैं और उनकी वहां पहचान गाँव में है | उनके माध्यम से हमने उस गांव के मुख्य व्यक्ति को फोन करवाया | चाचा जी ने उस व्यक्ति को हमारा ख्याल रखने का आग्रह किया और हमें भी सतर्क रहने की हिदायत दी |

मन में डर तो था ही लेकिन हम आगे बढ़े | उस गाँव के ब्लॉक थाने में हमने लिखित में दिया कि हम इस गाँव में सर्वे करने के लिए जा रहे थे | थाने में पुलिस बालों ने बोला “यही गाँव मिला था क्या तुम्हे सर्वे करने और कही कर लेते ! जा तो रहे हो संभल कर जाना और हाँ बाइक का ख्याल रखना |” अब मुझे पूरा भरोसा हो गया था कि गांव वास्तव में खतरनाक था | मन में डर लिए हम तीनों चोरगड़ी पहुंचे | हममें से एक बाईक के साथ उस व्यक्ति के घर के सामने ही रुकने का निश्चय किया जिनसे वकील साहब ने बात कराई थी | फिर हमने सर्वे की प्रक्रिया के अंतर्गत  20 घरों का सर्वे पूर्ण किया | गाँव से बाहर  निकलते ही राहत की सांस् ली और इस तरह उस चोरगाड़ी गाँव का सर्वे मैंने पूरा किया !

हम हमेशा असर की प्रक्रिया और असर नियम के साथ कोई समझौता नहीं करते, जैसे भी  हो कार्य पूर्ण करते हैं और  बो भी पूर्ण गुणबत्ता के साथ! यही हमें सिखाया गया है और यही हमारी पहचान है | यही बाते हैं जो हमें  कोई भी जोखिम लेने के लिए हौसला देती हैं | बिलिमा मेम को दुबारा गांव चेंज करने के लिए परेसान किये बगेर गांव कितना भी दूर हो किसी भी कौने में हो हम उसे ढूँढ निकालते हैं और पूरी गुणवत्ता के साथ सर्वे का कार्य पूर्ण करते हैं |

– Akhilesh is State Associate, ASER in Madhya Pradesh